संस्कृत के शास्त्रों में समाहित है सरल मानक संस्कृत के तत्त्व – डॉ. कृष्णमोहन पाण्डेय
Standard Sanskrit are Contained in the Sanskrit Scriptures
फरीदाबाद। दयाराम वशिष्ठ: Standard Sanskrit are Contained in the Sanskrit Scriptures: भारत सरकार के शिक्षा मन्त्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय भाषा समिति द्वारा प्रायोजित सरल मानक संस्कृत की दो दिवसीय कार्यशाला का समापन महोत्सव आज हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ, बघौला में अत्यन्त उल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर मुख्यातिथि डॉ. के.गिरिधर राव, शैक्षणिक समन्वयक, भारतीय भाषा समिति, नई दिल्ली ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारतीय भाषा समिति एवं भारत सरकार संस्कृत के विकास, प्रचार तथा प्रसार के लिए कटिबद्ध है। सरल मानक संस्कृत इसी कड़ी में एक प्रयास है। सरल मानक संस्कृत के द्वारा ही संस्कृत का और अधिक विन्यास होगा। इस अवसर पर बतौर विशिष्टातिथि डॉ. कृष्णमोहन पाण्डेय, सहाचार्य, संस्कृत एवं प्राच्य विद्या अध्ययन, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने स्पष्ट कहा कि सरल मानक संस्कृत के सम्पूर्ण तत्त्व संस्कृत के शास्त्रों में समाहित है। हम सभी को उन शास्त्रों का अध्ययन करना चाहिए।शास्त्रों के अध्ययन से ही संस्कृत मानक और सरल होगी। भाषा का सम्यक् अध्ययन व्याकरण से होता है।

सम्मानितातिथि के रूप में डॉ. अरुण कुमार मिश्र, सहाचार्य, संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने ‘सरलमानकसंस्कृतस्य क्रियान्वयनाय केचन उपायाः’ इस विषय पर सारगर्भित व्याख्यान प्रदान किया। उन्होंने कहा सरल मानक संस्कृत के क्रियान्वयन के लिए हमें भरसक प्रयास करना होगा। उन्होंने इसके लिए अनेक उपायों की चर्चा की। सारस्वत अतिथि के रूप में डॉ. ललित किशोर शर्मा, सहायक आचार्य, संस्कृत साहित्य विभाग, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर, जयपुर उपस्थित रहे।उन्होंने प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि सरल मानक संस्कृत के द्वारा छात्रों में सम्भाषण की प्रवृत्ति और अधिक विकसित होगी। अध्यक्ष के रूप में विद्यापीठ के प्राचार्य प्रो. दिलीप कुमार राणा ने सरल मानक संस्कृत को समय की परमावश्यकता बताया। छात्रों को बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह समय अब संस्कृत का है। संस्कृत के बिना समाज की कल्पना की नहीं जा सकती । कार्यशाला की निर्विघ्न समाप्ति पर सभी को शुभकामनाएँ भी प्रस्तुत की।
कार्यशाला में आज चार सत्र हुए जिनमें संस्कृत भारती के पूर्णकालिक कार्यकर्ता श्रीमान् ऋषिरञ्जन जी ने ‘संज्ञापदेषु विभक्तियोजनम्’ इस विषय पर व्याख्यान प्रदान किया।डॉ. कृष्णमोहन पाण्डेय ने विभिन्नक्षेत्रेषु सरलमानकसंस्कृतस् क्रियान्वयनम् इस विषय पर अपने विचार रखें।
सम्पूर्ति समारोह में तुलाराम वशिष्ठ, सरपंच, बघौला, दिनेश तायल, सचिव, विद्या प्रचारिणी सभा, बघौला, बघौला के गणमान्य नागरिक, डॉ. राजकुमार मिश्र,डॉ. छोटू कुमार मिश्र, संयोजक डॉ. राधावल्लभ शर्मा, मदनगोपाल शर्मा, रजत वशिष्ठ, देवेन्द्र वशिष्ठ, बिशन वशिष्ट तथा विद्यापीठ के समस्त छात्र उपस्थित रहे।
अन्त में कार्यशाला सम्पूर्ति अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किये गये। इसी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।